छतरीहीन मथेला

मनोभाव पर संयम रखना,

कर्म अकाट्य अकेला |

 

रोजीरोटी के जुगाड़ का,

ढोना एक पहाड़,

हाड़-तोड़ श्रम करना प्रतिदिन,

नरम कलेजा फाड़,

बिना अंतरा, गीत लगा ज्यों,

छतरीहीन मथेला |

 

कहते लोग पहेली जीवन,

सुख-दुख का गठजोड़,

केवल झूठ बढ़ा है आगे,

सच की बाँह मरोड़,

सुना, नीम कड़वा होता है,

उस पर चढ़ा करेला |

 

बाँधी मास्क बना पत्ते का,

अगिन अगोचर धूप,

कहीं न मिल जाए कोरोना,

और देख ले रूप,

इस जमात में लोग बहुत हैं,

पाले कई झमेला |

 

आँखों में है कल की चिंता,

गोदी में कुलधर्म,

सूरज का उगना-डुबना ही,

दुसह समय का मर्म,

यह व्यापक संकट कुछ दिन का,

है भी नया नवेला |

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