कोरोना की करुण कथाएँ
ऐसा पहले नहीं हुआ जो,
एक अपरिचित
सन्नाटा है,
गाँवों-गाँवों, शहरों-शहरों |
बंद चिमनियाँ, गाड़ी-छकड़े,
बंद पड़ीं
शिक्षण-संस्थाएँ,
बंद पड़ी हैं
मन्दिर-मस्जिद-
गुरुद्वारे, उमड़ी आस्थाएँ,
चिंताओं में
डूबा है मन,
घंटों-घंटों, पहरों-पहरों |
टिकट कटे ठंडे
बस्तों में,
संशय में
अनगिन यात्राएँ,
आस पास केवल
रहती हैं,
कोरोना की
करुण कथाएँ,
एक अनोखा डर
फैला है,
सड़कों-सड़कों, डहरों-डहरों |
आँखों की
पलकों तक उतरी,
सावन-भादों वाली बरसा,
फागुन के दिन
गए न लौटे,
आए हुए, हुआ है अरसा,
आश्चर्यों की
गाथा अद्भुत,
नदियों-नदियों, लहरों-लहरों |
उड़ी हवाओं की
चरचा है,
खतरे में हैं
गली-मुहल्ले,
पीले-पीले हरे-हरे हैं,
वट-अशोक के फूटे कल्ले,
है वसंत भी
दहला-दहला,
बरगद-बरगद, रहरों-रहरों |
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