बोरे के चाँचर
बोरे के चाँचर से,
झाँक रहा गीत |
धान पका, हँसती है
झाँवरी जमीन,
मकई की दलिया में ,
काँकरी महीन,
आँगन में लुगरी को,
टाँक रहा गीत |
पीपल का पात, हाथ
पोंछ रही धूप,
खूँटी के डेरा पे,
लेटा है सूप,
ढकनी में मार्हा को,
फाँक रहा गीत |
आवारा पशुओं से,
घायल हैं खेत,
सरकारी अमले की
आँखों में रेत,
गायें दोपहरी में,
हाँक रहा गीत |
माची बबूल पे है,
बादल की छाँह,
सूरज ने पकड़ी है,
संध्या की बाँह,
गेहूँ की ढेरी को,
ढाँक रहा गीत |
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