क्या हुआ कि
तुम आये, क्या हुआ कि मन का,
आँगन चहक गया |
ज्यों ही आँख
लगी सुषमा की,
पुरवा डोल गई,
खुशियों के घर
के दरवाजे,
दूर्वा खोल गई,
नई सुगंधों से
सुधियों का,
आँचल महक गया |
संबंधों के
अधरों के हैं,
बंद किवाड़
खुले,
बिंबों के
अतिरिक्त, शब्द के,
छंद निवाड़ धुले,
बहुत दिनों के
बाद गीत का,
फागुन गहक गया |
भावों की
चैतन्य अवस्था,
शहनाई गूँजी,
भाषा को मिल
गई शिल्प की,
एक नई पूँजी,
भटका अपना मार्ग, कहन का,
लहजा लहक गया |
भावगम्य हो गये
विशेषण,
संबोधन बदले,
शब्दवेध हर
गीततत्व के,
संशोधन बदले,
ध्वनि वृंदावन
का वंशीवट,
मंथन बहक गया |
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