सुधी अक्षरो !

सुधी अक्षरो ! तनिक सजग,

चैतन्य रहो तुम,
शब्दों की सरकार बनेगी |

वैसे तो, अनगिनत दलों के,
तुम सदस्य हो,
चुनते ही तुम, महामहिम हो,
तुम रहस्य हो,
एक समंजस और लयात्मक,
विधा समर्थित,
वैधानिक अनुहार बनेगी |

अर्थोपार्जन, सादर आदर,
तुम पीड़ा हो,
संविधान तुम, तुम धारायें,
तुम ईड़ा हो,
अनुभावों के अमित अवतरण,
सहज सत्यता,
वीणा की मनुहार बनेगी |

सहज सरल तुम, बोधगम्य हो,
तुम महान हो,
तुम गरीब का, दाना-दुनका,
तुम मकान हो,
एक रहे तो, भव्य एकता,
जनमत की जय,
ध्वनिमत की झनकार बनेगी |

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