जिसको हम सूरज कहते हैं

जीवन की उन घटनाओं की

कड़ियों को नित काट रहा है,

एक लुहार !

जिसको हम सूरज कहते हैं |

 

अपरिमेय ऊर्जा का साधन,

जीने का है, संबल अनुपम,

असह विषमताओं की स्वर्णिम,

धूप कुनकुनी, कंबल निरुपम,

घूर्ण-पहाड़ा पढ़ता रहता,

समय काठ को गढ़ता रहता,

एक सुतार !

जिसको हम सूरज कहते हैं |

 

रात और दिन, एक परिधि पर,

चलता रहता, दिया जलाये,

अंधकारमय गहन निशा को,

तारों का झुमका पहनाये,

नील गगन में जहाँ खड़ा है,

सोनजूहिया रथी पड़ा है,

एक सुनार !

जिसको हम सूरज कहते हैं |

 

हिलियम, लोहा, निकिल तत्व है,

उद्जन की है ओढ़ी चादर,

आग लगी रहती है अंदर,

फिर भी पाता ग्राह्य समादर,

अपने केंद्र विन्दु की चक्की,

घुमा रहा स्वाभाविक झक्की,

एक कुम्हार !

जिसको हम सूरज कहते हैं |  

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