साफ हवायें
सूरज आया, धुंध ओढ़कर,
साफ हवाएँ, गई हुई हैं,
चौपाटी पर खाने
अंडे |
मौसम की नस-नस में कुहरा,
देहों में है, खींचा-तानी,
सिहरन का हैं
अकथ कथानक,
सरदी की है करुण कहानी,
ऋतुओं के
दाखिल खारिज के,
कागज लगे
गाड़ने झंडे |
पानी की टंकी
पर बादल,
लगता है, हाँ !, टहल रहे हैं,
टँगे घोंसलों
के द्वारों पर,
छोटे शावक बहल
रहे हैं,
जोरन थर-थर काँप रही है,
लगे अलाव
जलाने कंडे |
बाँसों के झुरमुट
में लगता,
कोई मौन कराह
रहा है,
धूप खिलेगी, हो सकता है,
मन-मन पौन सराह रहा है,
खेत जोतने
निकल रहे हैं,
हलवाहों के
पैने-डंडे |
बहुत निरीह
अवस्था में है,
बहते झरने की
सरगर्मी,
आसमान की किस
चोटी से,
ओले टपक रहे
बेशर्मी,
नदी किनारे
तान छतरियाँ,
भूत उतार रहे
हैं पंडे |
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