फिर थाने की बात करेंगे

रुक जाओ दो-चार और दिन,

दाम प्याज का घट जाने दो,

फिर लाने की बात करेंगे |

 

बारातों की बहुत भीड़ है,

जहाँ जाम का खतरा भी है,

तंग गली है, आज पैंठ है,

जगह जगह पर कचरा भी है,

वर्षा में है कीचड़ का डर,

बादल भी कुछ, छँट जाने दो,

फिर जाने की बात करेंगे |

 

आपस में है, तू-तू मैं-मैं,

अब किस किसकी करें मनौती,

सब तो अपनी हाँक रहे हैं,

देते भी हैं रोज चुनौती,

पहले तो वक्तव्य समझ लें,

और कथन को नट जाने दो,

फिर माने की बात करेंगे |

 

स्वयं निपटना है उस मन की,

चकमा देती कमजोरी से,

क्या कोई खुशहाल हुआ है?

पूछेंगे जाकर होरी से,

धनी हो गई बहुत दलाली,

उसका पत्ता कट जाने दो,

फिर थाने की बात करेंगे |

टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

अरे ! बादलो !!

ठण्ड हुई शहराती

कोरोना की करुण कथाएँ