सिगरेटों की आगजनी तक
उगता सूरज आ जाता है,
बाहर खिड़की के
शीशे में
घर की छोटी
बालकनी तक |
प्राधिकरण के
मानचित्र से,
जबसे आँगन लुप्त हुआ है,
अंदर तक आ
जानेवाला,
किरणन-घोड़ा मुक्त हुआ है,
धूप खेलती घर
की छत पर,
शुद्ध हवा के आसमान से,
सिगरेटों की
आगजनी तक |
गमलों के
पौधों की छाया,
मौन किसी से
बतियाती है,
अपनी
पंखुड़ियों का आँचल,
झाड़-पोंछकर सरियाती है,
किरणों के सँग
चुपके-चुपके,
मन प्रसन्न हो
रोज पहुँचता,
पोखरवाले
रामधनी तक |
छिपी हुई है संबंधों
में,
खींचतान की एक
कनेठी,
नहीं आँख से
आँख मिलाता,
भाँज रहा है
समय बनेठी,
गूढ़ वाक्य का
अर्थ समझता,
बातचीत की
छिड़ी जंग का,
गड़बड़झाला तनातनी तक |
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