यह न होगा
ऐ ! हवाओ !! यह बताओ !!!
आजकल हम, नये युग में,
किस दिशा में
बह रहे हैं?
मानते हैं,
सत्य को
स्वीकारना तो,
कष्टदायी है जटिल भी,
है अचंभा,
झूठ सुनकर, कुछ न कहना,
नहीं नैतिक है कुटिल भी,
इसलिये इस बात
को हम,
जोर देकर,तन्मयी हो,
निडर होकर कह रहे
हैं |
बंद करके,
यह लिफाफा, आज मन की,
कोठरी में रख रहे हैं,
याद रखना,
आतमा जो, कह रही है,
भाव वे सब लख
रहे हैं,
समय सब कुछ, स्वयं ही पट,
खोल देगा, कुछ दिनों में,
कल, कहाँ अब रह रहे हैं?
लेखनी चुप,
रह सकेगी, यह न होगा
और नस में, हुक रहेगी,
यह लहर जो,
चल रही है, द्वेष की अब,
काव्य कालिक, तुक रहेगी,
संशयों में
शब्द होंगे,
अल्प होगा ओम्
का स्वर,
अर्थ यह ही तह
रहे हैं |
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