आने लगी हवा फैशन में
आने लगी हवा फैशन में,
लगे टाँगने
खेत सुनहरे,
फलियों को
फसलों की झालर में |
लटक गई केले
की छत से,
लंबी हरिअर
घौद,
गेंदा क्यारी
से उखाड़कर,
रोप रहा है
पौद,
मंजरियों का
नव संवत्सर,
बाँध चुका है
टाई मंजुल,
रंग बिरंगे द्रुम के कालर में |
जड़ी लिखावट
जैसे लगते
हैं, वृक्षों के भाल,
सागर की नौकाओं
पर हैं
फहर रहे ज्यों पाल,
हाकिम फागुन
छपा रहा हो,
नैसर्गिकता की
मशीन से,
नई करेंसी रूबल-डालर में |
माँगफूल सोने
का, पहनी
सरसों की हर
डाल,
तालाबों में
सैर कर रहे,
कमल-हंस-शैवाल
हरी दूब की
कोमल पिच पर,
गुगली फेंक
रहा है सावन,
सक्षमता है, दम है, बालर में |
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