चिलीबिली है धूप

कुसुमों की है घनी वाटिका,

खिली-खिली है धूप |

 

मटरों की पक गईं छीमियाँ,

गेहूँ है तैयार,

सरसों का मन मचल रहा है,

सुरभी का पैसार,

एक कल्पना है किसान की,

चिलीबिली है धूप |

 

मौन चना है अति आनंदित,

अलसी की है मौज,

हर्ष लुटाने की आशा में

है, मौसम की फौज,

पार रही है मूँग तिलौरी,

हिलीमिली है धूप |

 

आदर्शों की संगतियों में,

रहता आया गाँव,

सतरंगी सपनों में जीती,

उम्मीदों की छाँव,

पुरवाई के आँचल-आँचल,

बँधी-बँधी है धूप |

 

वटवृक्षों की टहनी-टहनी,

है कलरव की गूँज,

रस्सी की साड़ी की चुन्नट

में हँसती है मूँज,

रेंड़ी की चट-चट की सुमधुर,

ध्वनि-बँसुरी है धूप |

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

अरे ! बादलो !!

ठण्ड हुई शहराती

कोरोना की करुण कथाएँ