हँसी-खुशी का डोला

कुहरा हटा, घटी कुछ सरदी,

निकली सजधज धूप,

नये वर्ष की हँसी-खुशी का,

डोला निकला है |

 

स्वाभिमान का अनुभव करते,

खिले हुए सब फूल,

मोती की माला से सज्जित,

पेड़-पहाड़ी-कूल,

सड़क किनारे की पगडण्डी,

निरख रही है रूप,

नये वर्ष के लोकतंत्र का,

टोला निकला है |

 

किरणों में है नई कांति की,

एक कनेरी चेन,

दुबकी-दुबकी, पड़ी कहीं है,

छल की कौरव-सेन,

फूटा बरतन टाँक पँजेरा,

पिये चैन का सूप,

नये वर्ष की उम्मीदों का,

होला निकला है |

 

नई सुबह के शब्द नयों से,

सँवर रहे हैं गीत,

सरसों की पगड़ी बाँधे हैं,

खेत-चेत-संगीत,

घर-घर में है चढ़ी कड़ाही,

उछल रहा है पूप,

नये वर्ष का नया केसरिया,

चोला निकला है | 

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