नाली जाम, सड़क पर पानी

नगरपालिका नगर-व्यवस्था

दयापात्र, दयनीय कहानी,

नाली जाम, सड़क पर पानी |

 

बाबू की बीबी की साड़ी

में, मोती की जरी लगी है,

जमा हुई सीवर की पूँजी,

भूल चूक की थरी लगी है,

नगरायुक्त बना है अंधा,

काट रहा है सोना-चानी |

 

बारिश हुई कि मेंढक निकले

उफन गये ऐरावत नाले,

नगरपालिका-सभागार में,

विज्ञापन के ग्रैंड फिनाले,

मटक रहा है नाच बिदेशिया

घूँघट उठा चुनरिया धानी |

 

क्रमचय-संचय अंको की है,

बीजगणित की स्वर्णिम माला,

गहन विचिंतन के विधान में,

लगा हुआ मकड़ी का जाला,

लोकत्रंत्र कैसे कह सकता?

कोउ नृप होउ हमें का हानी

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

अरे ! बादलो !!

ठण्ड हुई शहराती

कोरोना की करुण कथाएँ