पानी उछला है |

 


नदियों से नदियों का जोड़ा

जाना, सही कदम,

सुविधाओं का, हर आँगन तक,

आना, सही कदम,

लेकिन, दुःख की बात कि घर का,

डूबा कुठला है |

 

नगरपालिका की चौखट तक,

जल-विप्लव आया,

इस विकास के गलियारे का,

जनमत घबराया,

सुनते, चयनित देवदास ने,

अब सच उगला है |

 

करते प्राणायाम झुके सब,

बिजली के खंभे,

साँप पेड़ के कंधों पर हैं,

भरे पड़े भंभे,

कहता कथा प्रदूषण का वह,

ग्रामज उपला है |

 

देशाटन पर निकल चुकी है,

नदियों की धारा,

आँखों देखा हाल सुनाता,

मटिया जल सारा,

बरखा के मुँगरों ने ऋतु का,

सीना कुचला है |

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