हर लड़का दुष्यंत

आती कहीं न धूप,

मड़इयों के आँगन में |

 

पानी बोतल बंद,

गगन के चंदा जैसा,

नहीं जान का मूल्य,

आजकल सब कुछ पैसा,

नहीं बरसते मेघ,

गरजते बस सावन में |

 

मोटेरा में ट्रंप,

बजा मोदी का डंका,

सहमा-सहमा पाक,

चीन के मन में शंका,

होली के चलचित्र,

मचलते हैं फागुन में |

 

हरे पेड़ पर बैठ,

हँसा उन्नति का जिन है,

राजनीति का मार्ग,

पैर में चुभता पिन है,

तीत भोज का स्वाद,

घाव करता आनन में |

 

हर लड़का दुष्यंत,

बालिका शकुंतला है,

हर आँचल का पाड़,

लूक से जला-जला है,

लगे दाग अनचीन्ह,

प्रेम के हर दामन में |

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