बादलों के बीच सूरज

बादलों के बीच सूरज

घिर गया है |

 

हँस रहा है मुग्ध मानस,

झील का ऊँचा किनारा,

ढूँढ़ता नीले गगन के,

किरणमय सारे दियारा,

धूप का झुमका चमाचम

गिर गया है |

 

पर्वतों की चोटियों पर,

है अँधेरा कुछ घना सा,

किरण का जाना वहाँ, है

हो गया बिलकुल मना सा,

व्यंग्य वाणों से कलेजा

चिर गया है |

 

किस परी के देश में वह,

समय का घोड़ा गया है,

एक भी चिड़िया नहीं है,

उड़ कहीं उलझा बया है,

लहर लहराती नहीं, मल

थिर गया है |

 

पर्यटन के गाँव में है,

एक छतरी का बसेरा,

कुशलतापूर्वक जगा है,

साँझ से सोया सबेरा,

कमल ललछौहाँ खिला, दिन  

फिर गया है |

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