अरे ! बादलो !!

अरे ! बादलो !!

छेड़े रहना,

जागृति का संगीत |

 

दर्दो की चुप चुभन रात-दिन,

खेली दुबिया-चोंच,

संचित शब्दों की धरती पर,

देखी गई खरोंच,

अर्थ व्यंजना,

संवादों की,

कभी न हो भयभीत |

 

गहन कुहासा फैल रहा है,

इन्द्रधनुष सुनसान,

आधा मूर्छित पड़ा हुआ है,

खड़ी साँस का धान,

सजग आँकड़े,

चाट गये हैं,

नव युग के नवनीत |

 

चलन कलन की खुली हथेली,

पढ़ता रहा अतीत,

वह दिन ही अच्छा होता है,

जो जाता है बीत,

समाधान हर,

हल देता है,

आशा के विपरीत |

 

भाषा की उन अनुध्वनियों के,

अर्थपूर्ण हों वेग,  

अनुचिंतन के आँचल में हों,

नयी सोच के नेग,

नवगीतों की

पगडण्डी की,

पुरवा हो अनुनीत |         

टिप्पणियाँ

  1. अए हए !
    बहुत ही सुन्दर गीत 👍👍🌷🌷

    🌷🌷
    वह दिन ही अच्छा होता है
    जो जाता है बीत ! 👍👍

    🌷🌷 अर्थ, व्यंजना संवादों की
    कभी न हो भयभीत ! 👍👍

    जवाब देंहटाएं
  2. प्रभाव पूर्ण रचनाएँ। बधाई शुभकामनाएँ

    जवाब देंहटाएं

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